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Isaiah - यशायाह
अध्याय :
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01.
मोआब के विषय भारी भविष्यद्वाणी। निश्चय मोआब का आर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है; निश्चय मोआब का कीर नगर एक ही रात में उजाड़ और नाश हो गया है।
02.
बैत और दीबोन ऊंचे स्थानों पर रोने के लिये चढ़ गए हैं; नबो और मेदबा के ऊपर मोआब हाय हाय करता है। उन सभों के सिर मुड़े हुए, और सभों की दाढिय़ां मुंढ़ी हुई हैं;
03.
सड़कों में लोग टाट पहिने हैं; छतों पर और चौकों में सब कोई आंसू बहाते हुए हाय हाय करते हैं।
04.
हेशबोन और एलाले चिल्ला रहे हैं, उनका शब्द यहस तक सुनाई पड़ता है; इस कारण मोआब के हथियारबन्द चिल्ला रहे हैं; उसका जी अति उदास है।
05.
मेरा मन मोआब के लिये दोहाई देता है; उसके रईस सोअर और एग्लतशलीशिय्या तक भागे जाते हैं। देखो, लूहीत की चढ़ाई पर वे रोते हुए चढ़ रहे हैं; सुनो, होरीनैम के मार्ग में वे नाश होने की चिल्लाहट मचा रहे हैं।
06.
निम्रीम का जल सूख गया; घास कुम्हला गई और हरियाली मुझा गई, और नमी कुछ भी नहीं रही।
07.
इसलिये जो धन उन्होंने बचा रखा, और जो कुछ उन्होंने इकट्ठा किया है, उस सब को वे उस नाले के पार लिये जा रहे हैं जिस में मजनूवृक्ष हैं।
08.
इस कारण मोआब के चारों ओर के सिवाने में चिल्लाहट हो रही है, उस में का हाहाकार एगलैम और बेरेलीम में भी सुन पड़ता है।
09.
क्योंकि दीमोन का सोता लोहू से भरा हुआ है; तौभी मैं दीमोन पर और दु:ख डालूंगा, मैं बचे हुए मोआबियों और उनके देश से भागे हुओं के विरुद्ध सिंह भेजूंगा॥
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